1 ऐ ख़ुदा! अपनी शफ़क़त के मुताबिक़ मुझ पर रहम कर;
अपनी रहमत की कसरत के मुताबिक़ मेरी ख़ताएँ मिटा दे।
2 मेरी बदी को मुझ से धो डाल,
और मेरे गुनाह से मुझे पाक कर!
3 क्यूँकि मैं अपनी ख़ताओं को मानता हूँ,
और मेरा गुनाह हमेशा मेरे सामने है।
4 मैंने सिर्फ़ तेरा ही गुनाह किया है,
और वह काम किया है जो तेरी नज़र में बुरा है;
ताकि तू अपनी बातों में रास्त ठहरे,
और अपनी 'अदालत में बे’ऐब रहे।
10 ऐ ख़ुदा! मेरे अन्दर पाक दिल पैदा कर,
और मेरे बातिन में शुरू' से सच्ची रूह डाल।
17 शिकस्ता रूह ख़ुदा की कु़र्बानी है;
ऐ ख़ुदा! तू शिकस्ता और ख़स्तादिल को हक़ीर न जानेगा।