5 क्यूँकि उसका क़हर दम भर का है,
उसका करम उम्र भर का।
रात को शायद रोना पड़े पर सुबह को ख़ुशी की नौबत आती है।
11 तूने मेरे मातम को नाच से बदल दिया;
तूने मेरा टाट उतार डाला और मुझे ख़ुशी से कमरबस्ता किया,
12 ताकि मेरी रूह तेरी मदहसराई करे और चुप न रहे।
ऐ ख़ुदावन्द मेरे ख़ुदा,
मैं हमेशा तेरा शुक्र करता रहूँगा।