5 अपनी राह ख़ुदावन्द पर छोड़ दे:
और उस पर भरोसा कर,
वही सब कुछ करेगा।
6 वह तेरी रास्तबाज़ी को नूर की तरह,
और तेरे हक़ को दोपहर की तरह रोशन करेगा।
7 ख़ुदावन्द में मुतम’इन रह, और सब्र से उसकी आस रख;
उस आदमी की वजह से जो अपनी राह में कामयाब होता
और बुरे मन्सूबों को अंजाम देता है, बेज़ार न हो।