1 मेरी जान को ख़ुदा ही की उम्मीद है,
मेरी नजात उसी से है।
2 वही अकेला मेरी चट्टान और मेरी नजात है,
वही मेरा ऊँचा बुर्ज है, मुझे ज़्यादा जुम्बिश न होगी।
5 ऐ मेरी जान, ख़ुदा ही की आस रख,
क्यूँकि उसी से मुझे उम्मीद है।
6 वही अकेला मेरी चट्टान और मेरी नजात है;
वही मेरा ऊँचा बुर्ज है, मुझे जुम्बिश न होगी।