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Salmos 116

बचण परमसवर धनयव

1 करुँ ूं, इस करकयहिि़ाीं ै।

2 उसनओडलगै,

इस करकिदगभर उसनरयकरुँा।

3 रसुँ ओडी;

अधबत पडा;

मन्‍बत अर गणपडा।

4 मन्‍यहथनकरी,

"यहा, िनतणकबचे!"

5 यहकरमय अर धरै;

अर परमसवर दयकरण आळै।

6 यहळयां करै;

िकमजा, उसनउदकरया।

7 अपणआरजगहां हड;

ूँयहउपककरयै।

8 तन्‍ीं ै,

बहै,

अर ्‍कर बचै।

9 िरहने,

अपणे-आपनयहणकसदलदरहूँा।

10 मन्‍इस तरिां कहै, यहिकसकस कहै,116:10 यहोवा नै बिश्वास की कसोट्टी पै कस के कह्या सै, मै यहोवा पै भरोस्सा करुँ सूं इस करकै मन्‍नै कह्या "मै घणाए दुखी सूं"

"घणूं;"

11 मन्‍जलदबकहा,

"णस ै।"

12 यहितनउपककरै,

उनकबदलउसनितरिां िुँ।

13 खमधकटै,

यहीं ेंचढ़ािसनीं बचै।

14 यहतर अपणमन्‍नत, रयिां्‍लम-ख्‍उसकणसां करुँा।

15 यहभगतां ,

उसकनजर अनमै।

16 यहा, , ूं;

, अर ूं।

तन्‍धन िै।

17 तन्‍धनयवेंचढ़ाा,

अर यहथनकरुँा।

18 यहतर अपणमन्‍नतां ै,

लकउसकां

19 यहघर गणां ,

यरशल, ितर करुँा।

परमसवर ि करो!

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