11 जै मै कहूँ के अँधेरे म्ह तो मै छिप ज्याऊँगा,
अर मेरै चारु ओड़ का चान्दणा रात का अँधेरा हो ज्यागा,
12 फेर भी अँधेरा मन्नै तेरे तै ना छिपावैगा रात तो दिन की तरियां चान्दणा देवैगी;
क्यूँके तेरै खात्तर अँधेरा अर चान्दणा दोनु एक जिसे सै।
11 जै मै कहूँ के अँधेरे म्ह तो मै छिप ज्याऊँगा,
अर मेरै चारु ओड़ का चान्दणा रात का अँधेरा हो ज्यागा,
12 फेर भी अँधेरा मन्नै तेरे तै ना छिपावैगा रात तो दिन की तरियां चान्दणा देवैगी;
क्यूँके तेरै खात्तर अँधेरा अर चान्दणा दोनु एक जिसे सै।
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