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भजन संहिता 142:1-4

अत्याचारी तै राहत खात्तर बिनती

1 मै यहोवा की दुहाई देऊँ सूं,

मै यहोवा तै गिड़गिड़ाऊँ सूं,

2 मै अपणे दुख की बात उसतै खोल कै कहूँ,

मै अपणी समस्या उसकै आग्गै प्रगट करुँ सूं।

3 जिब मेरी आत्मा मेरे भित्तर परेशान होरी थी,

तब तू मेरी हालत नै जाणै था!

जिस रास्ते पै मै जाण आळा था, उस्से म्ह उननै मेरे खात्तर जाळ बिछाया।

4 मन्‍नै सोळी ओड़ देख्या, पर कोए ना दिख्या।

मेरी खात्तर शरण किते ना रही, ना मन्‍नै कोए पूच्छै सै।

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