अत्याचारी तै राहत खात्तर बिनती
1 मै यहोवा की दुहाई देऊँ सूं,
मै यहोवा तै गिड़गिड़ाऊँ सूं,
2 मै अपणे दुख की बात उसतै खोल कै कहूँ,
मै अपणी समस्या उसकै आग्गै प्रगट करुँ सूं।
3 जिब मेरी आत्मा मेरे भित्तर परेशान होरी थी,
तब तू मेरी हालत नै जाणै था!
जिस रास्ते पै मै जाण आळा था, उस्से म्ह उननै मेरे खात्तर जाळ बिछाया।
4 मन्नै सोळी ओड़ देख्या, पर कोए ना दिख्या।
मेरी खात्तर शरण किते ना रही, ना मन्नै कोए पूच्छै सै।