15 सारया की आँख तेरी ओड़ लाग्गी रहवै सै,
अर तू उननै बखत पै खाणा देवै सै
16 तू अपणी मुट्ठी खोल कै,
सारे प्राणियाँ नै खाणे तै छिकावै सै।
15 सारया की आँख तेरी ओड़ लाग्गी रहवै सै,
अर तू उननै बखत पै खाणा देवै सै
16 तू अपणी मुट्ठी खोल कै,
सारे प्राणियाँ नै खाणे तै छिकावै सै।
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