20 मेरे प्राण की हिफाजत कर, अर मन्नै छुड़ा;
मन्नै शर्मिन्दा ना होण दे,
क्यूँके मै तेरी शरण म्ह सूं।
21 खराई अर सिधाई मेरी हिफाजत करै,
क्यूँके मन्नै तेरे पैए आस सै।
20 मेरे प्राण की हिफाजत कर, अर मन्नै छुड़ा;
मन्नै शर्मिन्दा ना होण दे,
क्यूँके मै तेरी शरण म्ह सूं।
21 खराई अर सिधाई मेरी हिफाजत करै,
क्यूँके मन्नै तेरे पैए आस सै।