धन्यवाद की प्रार्थना
1 हे यहोवा मै तेरे ताहीं सराहूँगा, क्यूँके तन्नै
मेरे ताहीं खींच कै लिकाड्या सै,
अर मेरे दुश्मनां ताहीं मेरे पै
आनन्द न्ही करण दिया।
2 हे मेरे परमेसवर यहोवा,
मन्नै तेरी दुहाई दी अर तन्नै मेरे ताहीं चंगा करया।
3 हे यहोवा तन्नै मेरा प्राण अधोलोक म्ह तै लिकाड्या सै,
तन्नै मेरे ताहीं जिन्दा राख्या
अर कब्र म्ह पड़ण तै बचाया सै।
4 थम जो बिश्वास लायक सो!
यहोवा की बड़ाई करो,
अर जिस पवित्र नाम तै उसका स्मरण होवै सै,
उसका धन्यवाद करो।
5 क्यूँके उसका छो तो माड़ी देर का होवै सै,
पर उसकी प्रसन्नता जीवन भर की होवै सै।
भलाए रात नै रोणा पड़ै,
पर सबेरै आनन्द मिलैगा।
6 मन्नै तो अपणे चैन कै बखत कह्या था,
के मै कदे न्ही हटण का।
7 हे यहोवा तन्नै अपणी खुशी तै मेरे पहाड़ ताहीं मजबूत
अर स्थिर करया था;
जब तन्नै अपणा मुँह फेर लिया
तब मै घबराग्या।
8 हे यहोवा मन्नै तेरे ताहीं ए पुकारया;
अर प्रभु तै गिड़गिड़ाकै या बिनती करी, के
9 जिब मै कब्र म्ह चल्या जाऊँगा तो फेर मेरी मौत तै
के फायदा होवैगा?
के माट्टी तेरा धन्यवाद कर सकै सै?
के वा तेरी सच्चाई का प्रचार कर सकै सै?
10 हे यहोवा, सुण, मेरे पै दया कर;
हे यहोवा, तू मेरा मददगार बण।
11 तन्नै मेरे खात्तर दुख की घड़ी ताहीं नाच म्ह बदल दिया,
तन्नै मेरा टाट उतरवा कै मेरी कमर म्ह आनन्द
का पटका बाँधया सै;
12 ताके मेरा मन तेरा भजन गान्दा रहवै
अर कदे चुप न्ही हो।
हे मेरे परमेसवर यहोवा,
मै सदा तेरा धन्यवाद करदा रहूँगा।