Pular para o conteúdo
Publicidade

भजन संहिता 32:1-5

माफी पाण की आशीष

1 कितना धन्य सै वो जिसका पाप

माफ करया गया,

अर जिसका पाप ढक्या गया हो।

2 कितना धन्य सै वो माणस जिसके अधर्म

का यहोवा लेखा ना ले,

अर जिसकी आत्मा म्ह कपट ना हो।

3 जिब मै चुप रह्या

तब दिन भर कहरान्दे-कहरान्दे मेरी हड्डियाँ

पिंघळगी।

4 क्यूँके रात-दिन मै तेरे हाथ कै नीच्‍चै दब्या रह्या;

अर मेरी तरावट घाम32:4 घाम धूप की तरियां झुर्राहट

बणदी गई। (सेला)

5 जिब मन्‍नै अपणा पाप तेरे ताहीं बताया

अर अपणा अधर्म न्ही छिपाया,

अर कह्या, "मै यहोवा कै स्याम्ही अपणे अपराध मान ल्यूँगा;"

फेर तन्‍नै मेरे अधर्म अर पाप माफ कर दिये। (सेला)

Estes versículos te tocaram? Ore agora!

+581 estão orando agora.

Junte-se à corrente de oração.