परमेसवर खात्तर लालसा
1 जिस तरियां हिरणी नदी के पाणी खात्तर तिसाई सै,
उस्से तरियां, हे परमेसवर, मै तेरे खात्तर तिसाया सूं।
2 जिन्दे परमेसवर, हाँ परमेसवर, का मै प्यासा सूं,
मै कद जाकै परमेसवर नै अपणा मुँह दिखाऊँगा?
3 मै दिन अर रात अपणे आँसुआँ नै पीन्दा रहूँ सूं;
अर लोग दिन भर मेरे तै कहवै सै,
तेरा परमेसवर कित्त सै?
5 हे मेरे जी, तू क्यूँ गिरया जावै सै?
अर तू भित्तर ए भित्तर क्यूँ व्याकुल सै?
परमेसवर पै आस लगाये रहै;
क्यूँके मै उसके दर्शन तै उद्धार पाकै फेर उसका धन्यवाद करुँगा।
11 हे मेरे जी तू क्यूँ गिरया जावै सै?
अर तू भित्तर ए भित्तर क्यूँ व्याकुल सै?
परमेसवर पै भरोस्सा राख;
क्यूँके वो मेरे मुख की चमक अर मेरा परमेसवर सै,
मै फेर उसका धन्यवाद करुँगा।