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भजन संहिता 42:1-3,5,11

परमेसवर खात्तर लालसा

1 जिस तरियां हिरणी नदी के पाणी खात्तर तिसाई सै,

उस्से तरियां, हे परमेसवर, मै तेरे खात्तर तिसाया सूं।

2 जिन्दे परमेसवर, हाँ परमेसवर, का मै प्यासा सूं,

मै कद जाकै परमेसवर नै अपणा मुँह दिखाऊँगा?

3 मै दिन अर रात अपणे आँसुआँ नै पीन्दा रहूँ सूं;

अर लोग दिन भर मेरे तै कहवै सै,

तेरा परमेसवर कित्त सै?

5 हे मेरे जी, तू क्यूँ गिरया जावै सै?

अर तू भित्तर ए भित्तर क्यूँ व्याकुल सै?

परमेसवर पै आस लगाये रहै;

क्यूँके मै उसके दर्शन तै उद्धार पाकै फेर उसका धन्यवाद करुँगा।

11 हे मेरे जी तू क्यूँ गिरया जावै सै?

अर तू भित्तर ए भित्तर क्यूँ व्याकुल सै?

परमेसवर पै भरोस्सा राख;

क्यूँके वो मेरे मुख की चमक अर मेरा परमेसवर सै,

मै फेर उसका धन्यवाद करुँगा।

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