4 एक नदी सै जिसकै पाणी तै परमेसवर के
नगर म्ह
यानी परमप्रधान के पवित्र भवन नै
आनन्द होवै सै।
5 परमेसवर उस नगर के बीच म्ह सै, वो कदे
टळण का कोन्या;
पौ फटते ही परमेसवर उसकी मदद करै सै।
4 एक नदी सै जिसकै पाणी तै परमेसवर के
नगर म्ह
यानी परमप्रधान के पवित्र भवन नै
आनन्द होवै सै।
5 परमेसवर उस नगर के बीच म्ह सै, वो कदे
टळण का कोन्या;
पौ फटते ही परमेसवर उसकी मदद करै सै।
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