47 क्यूँके मै तेरी आज्ञा कै कारण सुखी सूं,
अर मै उनतै प्रेम राक्खूँ सूं।
48 मै तेरे हुकमां की ओड़ जिनतै मै प्रेम राक्खूँ सूं, हाथ फैलाऊँगा
अर तेरी विधियाँ पै ध्यान करुँगा।
47 क्यूँके मै तेरी आज्ञा कै कारण सुखी सूं,
अर मै उनतै प्रेम राक्खूँ सूं।
48 मै तेरे हुकमां की ओड़ जिनतै मै प्रेम राक्खूँ सूं, हाथ फैलाऊँगा
अर तेरी विधियाँ पै ध्यान करुँगा।