3 जै तू मेरै मन नै परखदा तो जै तू रात नै मन्नै सिखान्दा,
जै तू मन्नै परखदा तोभी खोट्टापण न्ही पान्दा;
मेरै मुँह तै अपराध की बात न्ही लिकड़ैगी।17:3 मेरै मुँह तै अपराध की बात न्ही लिकड़ैगी दुसरयां की तरियां मेरे मुँह तै अपराध की बात न्ही लिकड़ैगी
4 मानवीय काम्मां म्ह मै तेरे मुँह के वचन कै जरिये
अधर्मियाँ के राह तै अपणे-आप ताहीं बचाए राख्या।
5 मेरै पाँ तेरे राह म्ह मजबुत्ती तै टिके रहवै, फिसळै न्ही।