4 चाहे म्ह घोर अन्धकार तै भरी होई तराई म्ह होकै चाल्लूँ,
तोभी नुकसान तै न्ही डरुँगा,
क्यूँके तू मेरै गैल रहवै सै;
तेरी छड़ी अर लाठ्ठी तै मन्नै शान्ति मिलै सै।
4 चाहे म्ह घोर अन्धकार तै भरी होई तराई म्ह होकै चाल्लूँ,
तोभी नुकसान तै न्ही डरुँगा,
क्यूँके तू मेरै गैल रहवै सै;
तेरी छड़ी अर लाठ्ठी तै मन्नै शान्ति मिलै सै।