7 हे परमेसवर, तेरी करुणा किसी अनमोल सै!
माणस तेरे पंखां तळै शरण लेवै सै।
8 वे तेरे भवन के खाणे की
भरपूरी तै तृप्त होंगे,
अर तू उननै अपणी सुख की नदी
म्ह तै प्यावैगा।
9 क्यूँके जीवन का सोता तेरैए धोरै सै;
तेरे चाँदणे तै हम चान्दणा पावांगें।
7 हे परमेसवर, तेरी करुणा किसी अनमोल सै!
माणस तेरे पंखां तळै शरण लेवै सै।
8 वे तेरे भवन के खाणे की
भरपूरी तै तृप्त होंगे,
अर तू उननै अपणी सुख की नदी
म्ह तै प्यावैगा।
9 क्यूँके जीवन का सोता तेरैए धोरै सै;
तेरे चाँदणे तै हम चान्दणा पावांगें।