16 पर मै तेरी सामर्थ्य का यश गाऊँगा,
अर सबेरै तेरी करुणा का जयजयकार करुँगा।
क्यूँके तू मेरा ऊँच्चा गढ़ सै,
अर मुसीबत के बखत मेरा शरणस्थान ठहरा सै।
17 हे मेरे बल, मै तेरा भजन गाऊँगा,
क्यूँके हे परमेसवर, तू मेरा ऊँच्चा गढ़
अर मेरा करुणामय परमेसवर सै।