3 जिब मै अकास नै, जो तेरे हाथ का काम सै,
अर चाँद अर तारयां नै जो तन्नै ए बणाये सै, देक्खूँ सूं।
4 तो फेर माणस के सै के तू उसनै याद राक्खै,
अर आदमी के सै के तू उसकी सुधि ले?
5 क्यूँके तन्नै उस ताहीं परमेसवर तै थोड़ा ए घाट बणाया सै,
अर महिमा अर प्रताप का मुकुट उसकै सिर पै धरया सै।