सृष्टि कै जरिये सृष्टिकर्ता की महिमा का जिक्र
1 अकास परमेसवर की महिमा का जिक्र करण लाग रह्या सै;
अर अकासमण्डल उसकी हाथ्थां की कला नै जाहिर करण लाग रह्या सै।
2 दिन तै दिन बात करै सै,
अर रात नै रात ज्ञान सिखावै सै।
3 ना तो कोए बोल्ली अर ना कोए भाषा,
जड़ै उनकी आवाज सुणाई न्ही देन्दी।
4 फेर भी उनका स्वर सारी धरती पै गूँजग्या सै,
अर उनके वचन दुनिया की छोर ताहीं पोहचगे सै।
उन म्ह उसनै सूरज खात्तर एक मण्डप खड्या करया सै,
5 जो बन्दड़े की तरियां अपणे महल तै लिकाड़ै सै।
वो शूरवीर की तरियां अपणी दौड़ दौड़ण तै खुश होवै सै।
6 वो अकास की एक छोर तै लिकड़ै सै,
अर वो उसकै दुसरे छोर तक चक्कर मारै सै;
अर उसकी गर्मी सारया ताहीं पोहचै सै।
7 यहोवा के नियम खरे सै, वो जी म्ह नई ताजगी देवै सै;
यहोवा के नियम बिश्वास लायक सै,
साधारण माणसां नै बुद्धिमान बणा देवै सै।
8 यहोवा के उपदेश सिध्द सै; मन नै आनन्दित कर देवै सै;
यहोवा का हुक्म निर्मल सै, वो आँखां म्ह
रोशनी ले आवै सै।