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भजन संहिता 111

परमशर सच़़्ो रनएल

1 यहा।111:1 तारीफ़ केरा हल्‍लिलूय्याह अविां ां

डलां मनयहो।

2 यहां कमां बड़ां महआन,

़ेतन, रतन

3 ां सब कमां नदमहिलन,

धरसदतगर बनो।

4 अपनचमतकर,

यहअनरह रनदयरन

5 ़ैडर मनतन िि,

हमतगर अपनकररखो।

6 अपनकन ां-ां ि,

अपनकमां ि शकि िवर

7 सच़़्ाहथां ां कममन;

भरबलन,

8 शबहमा-हमअटल े,

सच़़्ाििरन

9 अपनकन टकि;

अपनकरहमरख

नवपविडरबले।111:9 लूक. 1:49,68.

10 अकलरआत यहडरे;

़ेमनतन,

ि समझ़ी

सदबनी।

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