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भजन संहिता 83

मनखलथन

आसभजन

1 परमशर ़ुपच़ाा;

परमशर ़ुा, ो!

2 , मन लगरन,

खलखड़ो वर

3 ां जनबनतन,

शरणां एवरां खलजनकढतन

4 ़ों, "एजअसां डम, ां ,

इसएलनवअग"

5 अक मन इतां जनबन,

खलकरि

6 एनएद

इशएली, आबी, हगी।

7 गबी, अमी, अमी,

पलिसमपलिआन

8 इन अशमल वर;

औलसह(ा)

9 एरहसल़ेिकन ं,

दरिसरििो।

10 एनदनगरां ,

उडि े।

11 मत रनलन ीं ओऱेे,

रधबह सल़े,83:11 ओरेब ते जेबह दूई मिद्यानी हाकिम एप्रैमी लोकेईं मारे। न्याय. 7:24-25.

12 ़ै़ोवरिूं,

"असां परमशरचरां अधिएपे।"

13 परमशर, बवडऱेे,

उड़ी ूं़ेबने।

14 अगगऱे़ै गलभसरत,

अऱे़ै पह्‍डत,

15 एनएन अपनि,

अपनडर!

16 इन मनतरबड़े इज़्,

ि यहइनपन

17 इनसदशरमिडर,

इन ां तरां ां , इन ,

18 ़ैइऩानन ि ि़ेनवयहआहे,

रतपरमपरधपरमशरे।

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