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भजन संहिता 77

बतरवकभर

बज़ाां रध: यद़, आसभजन

1 अवपरमशरां िनत़ोे-़ोो,

अवपरमशरां फरिो, ो।

2 एपनबतां ीं अपनरभां थनी,

तरहथ खड़े , ि्‍,

ीं तसल्‍

3 अवपरमशररतां कर ं;

अविरते-रतवरं; (ा)

4 एछ़़्ी बन;

अवएरहघबरि अवगल ीं ी।

5 अविरतं,

लन ़ैबड़ू ़िवर

6 अवअपनां रतं;

अपनमनां रतं,

ि आततलरतरहचे।

7 "रभहमो;

असन अज़़्ेकधपसो?

8 करहमखतम वर?

अज़़्ेफल े?

9 परमशरअनरह रनिसरो?

रतां अपनि सब दयकतां रख?" (ा)

10 अव़ोलगो, "े, ि रभपरमपरधइनहथ दलवर"

11 अवयहबडां कमां ि चरो;

अवचमत़ैीं वकां िे।

12 अवसब कममन ो,

बड़े कममन ो।

13 परमशर, बत पविरत

़ेबतपरमशरबरबर बड?

14 चमतरनपरमशरस,

ींां दरमिां अपनि शकि ांि

15 ़ी कतीं अपन,

नदवर(ा)

16 परमशर, समदर,

समदर ीं इतां ि ,

समदर िलनलगो।

17 िदलबड़ी ़ी ;

अमबर लगू,

इरां-उरां लनलगे।

18 ां आवकडकनलगी,

ििजलशन ;

िलती-िलतउछ़ी

19 बत समदरां,

बत ां;

पवां िपतलगे।

20 ीं ़ििे,

अपनां ि अगवगबां ़ेि ी।

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