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भजन संहिता 4

परमशरभर

रधबज़ा: ी। ऊदभजन

1 धरपरमशर, ़ैखन अवीं ां िनतीं, ीं े;

़ैखन अवेंां खन ीं ीं सहिो।

ीं दयथन

2 हव, इस तगर महिबदलइज़्े?

इस तगर गल्‍लन े, जन4:2 झूठे योजना झूठे ईश्वर ि तलां े। (ा)

3 रखि यहवफअपनअलग रतां रख;

़ैखन अवयहां थनि खन ो।

4 डरथरकता;

अपने-अपनि़ामनां ़ुपच़ा4:4 इफि. 4:26. (ा)

5 िकतबलि़ा़ा,

यहभररखा।

6 बड़े आन ़ै़ोतन, "असन िभलििो?"

यहा, अपनतरअसन चमका!

7 ीं िां करां भर,

़ै अनरस बड़े

8 अव़ु्‍ो;

िि, यहा, िीं रकिितस

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