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पजन 115

िएक सचपरमशर

1 यहा, ि, बलि जयजयक! महिूँ ,

कऊि करओर सचसद

2 ो-कऊआसएड़ा छणलगो, "परमशर ?"

3 परमशर वर;

िा, ििा।

4 पर ििवतईने-ाँिबणिि,

ूंआपबणि

5 िूँ अए, पर ि सकदिा;

िआखअए, पर ि सकदिा।

6 िअए, पर ि सकदिा;

िअए, पर ींि सकदिा।

7 िआथ अए, पर ुँि सकदिा;

िअए, पर चलि सकदि

ओर आपणगल़े शबि िकय़ी सकदिा।

8 िबणओए;

िि़े ि

ओर िाँपरखण़े सब ़े ऊई े।

9 इसएलो, रभाँपरो!

मतकरऩा ओर रकषक

10 ईतो, रभाँपरो!

मतकरऩा ओर रकषक

11 रभपगो, रभाँपरो!

मतकरऩा ओर रकषक

12 रभआसकरे; आसआशी;

इसएलकरआशी;

ईतआशी।

13 रभआपणपगे,

ा-बड़ेसबआशी।115:13 पजन 128:1

14 रभ

ओर ल-बचसदबढ़ां!

15 रभसरओर तरतिबऩा ,

सरितरफआश

16 वररभ,

पर तरतिूंी।

17 मरूं यहि ि करसकद

कऊि ु-ऊई पड़ी े,

18 पर आसयहएबलई

सदतक तनलदरणा।

यहि करो!

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