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पजन 95

ि

1 आओ आसरभिऊचिआवईए;

परमशर रककरसरजयजयककरो!

2 आससरतनयवकरदऊए मणआईए

ओर पजन ांऊए सरजयजयककरि

3 रभमहपरमशर

ओर सबवतमह

4 तरतििििजगयहआथ

ओर ़ो िूँिसरिईए

5 समसरईए ओर िबण

ओर जगसरआथरचन

6 आओ आसरभचरणसरआरधनकरि;

आपणबऩे रभमणिईए!

7 कऊि यहपरमशर ,

ओर आससररज, ओर सरआथि

आज परमशरआवो!95:7 निर्ग. 17:7

8 आपणिइतणि करो,

़ा िि

मरे, नसजगमसे।95:8 निर्ग. 17:1-7; गिण. 20:1-13; बिध. 6:16; 33:8

9 ां रभपरिी,

िां रभपरखा।

10 ़ितक आऊ़िरय

ओर ैं ा, परम़े मनओर इनि पछयी।

11 इजबजैं आई कसम

ि कदकरनिजगि सकणे।95:11 इब्रानी 3:7-19

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