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पजन 64

मणरकिथन

बज़े परदिऊदपजन

1 परमशर, ां ाँबऊत बत पड़ी ी, थन;

आऊआपणमणडर, एबूँ वनबचा!

2 करऩेिि

ओर अनरकरऩेिजनलके।

3 िआपणतलव़ी कर

ओर आपणकऊड़े वचऩे चढ़ाे,

4 ि आपणकसाँचल;

िाँडरदपनि।

5 करनईममत कर;

िखलबछिजनबणओए

ओर आपणआप, "आसि सकदा?"

6 करनजनबणओए

ओर एक, "आससमजपकजनबणी।

कऊि ूंमन ओर िबचबऊत गईर"

7 पर परमशरिाँआपणचले;

अचणक यल ऊई े।

8 परमशरििखलबदल

ि कर ऊई ;

िखण़ेआपणा-आपणिईलांऊए िमजा।

9 डर

ओर परमशरिमहबखकरन

ओर सरिमहचदरणे।

10 यहआपणतरि ओर िआशो।

ओर सरिशरणरण़े सरजयजयककरो।

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